हम ज्ञान-किरण पृष्ठ के माध्यम से  रचनात्मक-लेखन को बढ़ावा देना चाहते हैं। विद्‌यार्थियों की सुविधा के लिए निबंध-लेखन, पत्र-लेखन, भाषण-लेखन, फ़िल्म-समीक्षा, पुस्तक-समीक्षा, साक्षात्कार-लेखन, संवाद-लेखन, ्डायरी-लेखन, ब्लॉग-लेखन, ईमेल-लेखन, फ़ीचर-लेखन आदि विषयों पर विस्तार से चर्चा तथा उनके विभिन्न प्रारूपों  के उदाहरण  प्रस्तुत किए जा रहे हैं। हमें आशा है कि इस प्रयास से रचनात्मक-लेखन के प्रति विद्‌यार्थियों में रोचकता और सक्रियता बढ़ेगी।

                                                                                  भाषण-लेखन
                                                                             (Speech-Writing)


भाषण एक कला है जिसके माध्यम से हम किसी विषय पर अपने विचारों को श्रोताओं के सम्मुख अभिव्यक्त करते हैं। शब्दकोश में भाषण का अर्थ है धाराप्रवाह रूप में किया गया विवरण, वार्तालाप, कथन, कही गई बात, बोलना, बात कहना आदि।

भाषण में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए –
१. एक अच्छा भाषण उसके संदेश पर आधारित होता है। अत: भाषण लिखते समत उसका संदेश पूर्णत: स्पष्ट होना चाहिए।
२. भाषण में रोचकता होनी चाहिए जो श्रोताओं की रुचि के अनुरूप हो।
३. विषय के अनुरूप भाषण में तथ्य, जाकारी, सूचना का समावेश हो।
४. भाषण में विषय के अनुसार भाषा में जोश, उत्साह का भाव होना चाहिए।
५. विषय के अनुरूप मुहावरे, लोकोक्तियों का प्रयोग होना चाहिए।
६. भाषण में नाटकीयता होनी चाहिए ताकि श्रोताओं को बाँधे रखे।
७. भाषण में विवाद या अनावश्यक बातों के उल्लेख से बचना चाहिए।
८. भाषण में विषय की पूर्णता होनी चाहिए।
९. भाषण में बार-बार श्रोताओं को संबोधित करते रहना चाहिए।

विद्‌यार्थी भाषण लिखते समय  निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखें –
१. भाषाण की शुरुआत आदरणीय अध्यक्ष, प्रधानाचार्य, शिक्षख-वृंद तथा प्रिय साथियो, सहपाठियो के साथ करें। संबोधन करते समय यदि बहुवचन का प्रयोग किया गया है तो उसमें अनुस्वार का प्रयोग नहीं करें। जैसे – प्यारे भाइयो, बहनो, मित्रो आदि।
२. तत्पश्चात विषय की प्रस्तावना देनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो जाए कि आप किस विषय पर सभा को संबोधित करेंगे।
३. विषय को उपविषयों में बाँटकर उन्हें लिखना चाहिए।
४. महत्वपूर्ण कथन या दूसरों के शब्दों के साथ शुरुआत करने से आपकी विश्वसनीयता स्थापित होती है। जैसे – “बच्चे देश का भविष्य होते हैं।“
५. हमेशा "अपना" शब्द का प्रयोग करें-- अपना दल, अपना शहर/ राज्य/ देश, अपना स्कूल या विद्यालय, अपनी कक्षा के साल, अपना काम, लोग, और उत्पाद/उम्मीदवार आदि I इससे दर्शक अधिक अपनापन महसूस करेंगे।
६. भाषण में रोचकता बनाने के लिए विषय से संबंधित कविता, घटना, शेर, चुटकला आदि का प्रयोग करें।
७. भाषण की भाषा सहज, स्पष्ट तथा चित्रात्मक होनी चाहिए।
८. भाषण में लिखित तथ्य और विचार विषय से संबंधित होने चाहिए।
९. भाषण में गैर-जरूरी बातों का समावेश न करें।
१०. भाषण का अंत सटीक निष्कर्ष से करें।
११. भाषण के अंत में श्रोताओं का आभार प्रकट करें।

फ़िल्म समीक्षा

Film Review

फ़िल्म-समीक्षा एक कला है जिसके माध्यम से समीक्षक फ़िल्म के कथ्य और शिल्प (Content & Form) की बारीकी से अध्ययन करता है और पाठकों को यह बताते की कोशिश करता है कि फ़िल्म कैसी बनी है। एक अच्छी फिल्म समीक्षा वह है जो मनोरंजन करे, समझाए और निष्पक्ष विचार दे।

फ़िल्म-समीक्षा लिखने के पूर्व निम्नलिखित शोध-कार्य करें –

१. फिल्म के बारे में बुनियादी तथ्यों को इकट्‌ठा करें क्योंकि आपको अपनी समीक्षा में तथ्यों की जानकारी देने की आवश्यकता पड़ेगी। आपको यह जानने की जरूरत है –

 

फिल्म का शीर्षक, और उसके प्रदर्शन का साल, निर्देशक का नाम, प्रमुख अभिनेताओं के नाम, फिल्म की शैली, फ़िल्म की कहानी का सारांश, संगीत, पार्श्व-ध्वनि, संवाद

 

२. फ़िल्म की क्रियाविधि का विश्लेषण करें।

  • फ़िल्म का निर्देशन कैसा है?
  • फ़िल्म को बनाने में किस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, छायांकन कार्य कैसा है?
  • संवाद तथा पात्र-वर्णन सहित पटकथा (Script) का मूल्यांकन करें।
  • संपादन (Editing) कार्य कैसा है, फिल्म टुकड़े- टुकड़े सी थी या एक दृश्य से दूसरे दृश्य में सुचारू रूप से धारा प्रवाह चल रहा है?
  • परिधान ( कॉस्टयूम) डिजाइन। क्या परिधान चुनाव फिल्म की शैली के अनुरूप है?
  • फ़िल्म का संगीत, गीत और पार्श्व-ध्वनि कैसी है?

 

फ़िल्म-समीक्षा लेखन का तरीका

अपने शोध के आधार पर समीक्षा लिखना शुरू करें। शीर्षक लिखने के बाद फ़िल्म से संबंधित एक आकर्षक भूमिका लिखें। तत्पश्चात फ़िल्म की कहानी का संक्षिप्त सारांश लिखें जिसमें पात्रों के नाम दें तो साथ में कोष्ठक में अभिनेताओं के नाम का उल्लेख करें। कहानी का क्लाइमेक्स न लिखें क्योंकि तब दर्शकों में फ़िल्म देखने की दिलचस्पी समाप्त हो जाएगी। केवल दर्शकों में उत्सुकता बढ़ाने के लिए संकेत मात्र लिख दें।

अगले पैराग्राफ में फ़िल्म की क्रियाविधि पर अपनी आलोचनात्मक विश्लेषण लिखें जिसमें फ़िल्म-निर्माण संबंधी बातों का उल्लेख किया होगा।

फिल्म में कोई संदेश दिखता है, या यह दर्शकों से एक विशेष प्रतिक्रिया या भावना को निकालने का प्रयास करती है? आप इस बारे में चर्चा कर सकते है कि फिल्म अपने स्वयं के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल हुई या नहीं।

फ़िल्म-समीक्षा का समापन निर्माता, निर्देशक, मुख्य अभिनेताओं के नाम, संगीत निर्देशक आदि प्रमुख व्यक्तियों के नाम से कर सकते हैं। अंत में फ़िल्म पर आपकी रेंटिंग क्या है, इसका जिक्र करना अत्यंत जरूरी है।